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Jaapak
भगवद्गीताअध्याय 9

अध्याय 9: राजविद्याराजगुह्ययोग

Rāja Vidyā Yog

इस अध्याय में 1 श्लोक हैं।

  1. 9.22
    अनन्य भक्ति — गीता 9.22 का गहरा वचन और असली वादा

    अनन्य भक्ति का असली वादा क्या है? गीता 9.22 में कृष्ण ने योग और क्षेम — दो अलग वचन दिए हैं। इस श्लोक का गहरा अर्थ जानें।