भगवद्गीताअध्याय 18
अध्याय 18: मोक्षसंन्यासयोग
Mokṣha Sanyās Yog
इस अध्याय में 1 श्लोक हैं।
- 18.66सर्वधर्मान परित्यज्य: शरणागति का असली अर्थ
'सर्वधर्मान् परित्यज्य' का अर्थ घर छोड़ना नहीं — मन की कौन-सी बैसाखियाँ छोड़नी हैं? और पुण्य-कर्मों की गठरी क्यों? गीता 18.66।